Monday, November 16, 2015

Tuesday, October 20, 2015

GauMata

॥ देसी भारतीय गौ, राष्ट्र के लिये वरदान है ।।   


सिर्फ भारत में पाये जाने वाली देसी गाय इतनी गुणकारी है, कि अकेले दम पर पूरे राष्ट्र का  कृषि विकास, स्वास्थ्य विकास, ईंधन आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण कर सकती है, हजारो करोड़ राष्ट्रिय मुद्रा बचा सकती है, समाज में अपराध कम कर सात्विकता ला सकती है।  यह कोई धार्मिक नहीं अपितु वैज्ञानिक परीक्षणों पर परखी गयी बात है।

  • गौदुग्ध को आहार शास्त्रियों ने सम्पूर्ण आहार माना है और पाया है।गाय के एक पौण्ड दूध से इतनी शक्ति मिलती है, जितनी की 4 अण्डों और 250 ग्राम मांस से भी प्राप्त नहीं होती। धरती पर केवल गौदुग्ध ही हैं जो परम सात्विक, ऊर्जावान, बुद्धिवर्धक और स्वास्थवर्धक है, उसके जैसा कोई नहीं।
  • गाय की रीढ़ में सूर्यकेतु नाड़ी होती है, जो सूर्य के संपर्क में आ कर गौदुग्ध में स्वर्ण मिला देती है। यह स्वर्ण मिला गौदुग्ध इसलिए हल्का पीला होता है।
  • गौमूत्र से लगभग 108 रोग ठीक होते हैं जैसे :  मोटापा, कैंसर, डायबिटीज, कब्ज, गैस, भूख की कमी, वातरोग, कफ, दमा, नेत्ररोग, धातुक्षीणता, स्त्रीरोग, बालरोग आदि।
  • गंदगी व महामारी फैलने पर गोबर गौमूत्र का छिडक़ाव करने से लाभ होता है।
  • देसी गाय ही ऐसा जीव है जो स्वास में ऑक्सीजन लेती  है और ऑक्सीजन ही छोड़ती   है।
  • गाय के रम्भाने से वातावरण के कीटाणु नष्ट होते हैं। सात्विक तरंगों का संचार होता है।
  • एक टोला गौघृत का हवन करने से 1 टन आक्सीजन पैदा होता है।  – वैज्ञानिक शिरोविचा, रूस
  • गाय के प्रश्वांस, गोबर गौमूत्र के गंध से वातावरण शुद्ध पवित्र होता है।
  • गाय के पास खड़े हो हाथ फेरने से कई गंभीर मनोरोग ठीक होते  हैं।
  • केवल देसी गाय के गोबर में ही  रॅडीओएक्टिव तरंगों को सोखने की शक्ति होती है। परमाणु संयंत्रों में इसका विशेष प्रयोग होता है।
  • गाय के गोबर से प्रतिवर्ष 4500 लीटर बायोगैस मिल सकता है। अगर देश के समस्त गौवंश के गोबर का बायोगैस संयंत्र में उपयोग किया जाय तो वर्तमान में ईंधन के रूप में जलाई जा रही 6 करोड़ 80 लाख टन लकउ़ी की बचत की जा सकती है। इससे लगभग 14 करोड़ वृक्ष कटने से बच सकते हैं।
  • गाय के गोबर से एक गैस निकलती है जिसे मैथेन कहते हैं और मैथेन वही गैस है जिससे आप अपने रसोई घर का सिलंडर चला सकते हैं और जरूरत पड़ने पर गाड़ी भी चला सकते हैं 4 पहियो वाली गाड़ी भी !!
  • एक स्वस्थ  गाय एक दिन मे 10 किलो गोबर देती है और ढाई से 3 लीटर मूत्र देती है ! गाय के एक किलो गोबर से 33 किलो fertilizer organic  (खाद ) बनती है जो राष्ट्र के कृषि विकास के लियें अत्यधिक लाभकारी है।
  • एक देसी को काटने से उसके मॉस, खून, खाल, हड्डी से लगभग 10000 रुपय का फायदा होता है, परन्तु यदि वही गाय जीवित रहे तो जीवन भर अपने दूध, दही, घी, मूत्र, गोबर, स्वास, से लाखो रूपये का लाभ राष्ट्र को करती रहती है। यदि दूध न भी दे तो भी गौमूत्र,गौगोबर राष्ट्र के कृषि विकास और पर्यावरण विकास के लिए परम उपयोगी है।  

यह सब लाभ होते है केवल और केवल भारत में पाये जाने वाली देसी गाय  में ना कि विदेशो वाली जर्सी-हॉलीस्टर गायों में। भारतीय देसी गाय जैसा उपयोगी जीव पूरी धरती पर दूसरा नहीं, इसलियें supreme court ने 26 अक्तूबर 2005 में यह निर्णय सुनाया कि "गाय को काटना सांविधानिक पाप है धार्मिक पाप है ! और सुप्रीम कोर्ट ने कहा गौ रक्षा करना,सर्वंधन करना देश के प्रत्येक नागरिक का सांविधानिक कर्त्तव्य है ! सरकार का तो है ही नागरिकों का भी सांविधानिक कर्तव्य है "

अब आप ही बताइएं इतने उपयोगी जीव को मात्र मॉस के लियें मारना स्वयं राष्ट्र के विकास को मारने के सामान है।

गौ संवर्धन राष्ट्रिय कर्तव्य है

कृपया जानकारी को शेयर करें, राष्ट्र के विकास में सामाजिक जागरूकता में सहयोग करें ।

Tuesday, October 13, 2015

selfconfidence

नवरात्रों में करें आत्मविश्वास की साधना

जिसमे आत्मविश्वास है , यह दुनिया उसकी है। चाहे बड़ी से बड़ी चुनौती हो, आत्मविश्वास की शक्ति के आगे हर कोई नहीं ठहर पाता। आत्मविश्वास व्यक्ति जो काम हाथ में लेता है, उसे पूरा करके ही दम लेता है। यह आत्मविश्वास की ही शक्ति है जो व्यक्ति को गुणवान, पराक्रमी, बहादुर, प्रतिभाशाली, सफल व्यक्ति बनती है। पर हम कैसे बने आत्मविश्वासी ? कैसे बढ़ाएं अपने अंदर आत्मविश्वास?
आत्म-विश्वास वस्तुतः आत्मा से प्रकट हुई शक्ति है, जो हमारी आत्मा से निकलती है और हमारे समूचे व्यक्तित्व में घुल कर उसे महान बनती है। भारत के महान आध्यात्मिक धरोहर में कुछ ऐसे उपाय है, जिन्हें अपनाकर हम आत्मविश्वास बढ़ा सकते हैं, अपने व्यक्तित्व को उच्चतम शिखर पर ले जा सकते है।

गायत्री महामंत्र की भाव भरी उपासना (जप) द्वारा हमारी आत्मा एवं मन पर चढ़ी हुई मैल साफ़ होती है, जिससे आत्म-शक्ति पूर्ण रूप से आनी शुरू हो जाती है, और यह आत्म-विश्वास के रूप में हमारे समूचे व्यक्तित्व में घुलने लगती है। मात्र इस छोटे से उपाय द्वारा कोई भी व्यक्ति आत्मविश्वासी बन सकता है, प्रतिभाशाली बन सकता है।
नवरात्री का विशेष समय में ब्रह्माण्ड की प्रचंड शक्ति की वर्षा पृथ्वी पर होती है, अतः इस समय में की गई गायत्री उपसना कई गुना ज्यादा फल देती है।
सुबह में सवच्छ कपडे पहन किसी साफ़ स्थान में कोई दरी/चादर बिछा कर पूर्व दिशा की ओर मुँह कर बैठ जाएँ। सामने किसी किसी स्टूल/टेबल पर एक दीपक एवं जल का लोटा भर के रख ले। मन ही मन सूर्य देव को प्रणाम करें। गहरी श्वास लेते हुए पूर्ण एकाग्रता से गायत्री मन्त्र का भावभरा जप करे। गिनती के लियें माला या घडी का उपयोग कर सकते है। जितना करेंगे उतना अच्छा। अंत में प्रणाम कर के उठ जाएं और जल सूर्य देव को चढ़ा दे। मात्र इतने से उपाय द्वारा आप अपने जीवन में अद्भुत परिवर्तन ला सकते हैं ।

Friday, August 14, 2015

indipendence 2015

एक और लड़ाई पूर्ण स्वतंत्रा के लियें 

बहुत कम होते हैं ऐसे लोग, जिनमे देश के लियें कुछ करगुजरने का ज़ज्बा होता है। भारत के 69 स्वतंत्रा दिवस पर ऐसे सभी योद्धाओं को सलाम, जिन्होंने देशहित में कुर्बानियाँ दी और हमें आज़ाद कराया। अब समय है स्वतंत्रा की दूसरी लड़ाई का, जिसमे भारत को विकृत मानसिकता से स्वतंत्र कराना है। गरीबी, बेरोजगारी, अपराध, अनीति, शोषण से मुक्त कराना है। हमारे वीर शहीदों को पुनः जन्म लेना होगा, अधूरी पड़ी इस लड़ाई को पूरा करना होगा। उस गर्म खून को फिर से बहना होगा, आजके युवाओं का मार्गदर्शन करना होगा।

              वर्ना Open Mentality, Secularism, Professionalism के इस दौर में हम आधुनिक तो हो जायेंगे पर अपनी भारतीयता को भुला कर किसी और संस्कृति-विचारधारा के हो जायेंगे। और ऐसा होना राष्ट्र के लियें घातक है, क्योकि हर राष्ट्र की अपनी संस्कृति-विरासत होती है जो उसका जीवन होती है। यह संस्कृति ही समाज का निर्माण करती हैं; नयी पीढ़ी का निर्माण करती है।

         अगर संस्कृति मर गयी, तो भारत में भी बच्चे अपने तलाकशुदा माँ-बाप के प्यार को तरसेंगे, बुजुर्गों को घर में बोझ समझ उन्हें बहार फ़ेंक दिया जायेगा, पति-पत्नी जीवनभर का सुन्दर वैवाहिक जीवन ना जीपाएंगे। जीवन को मुक्ति का मार्ग न समझ सिर्फ भोग का मार्ग समझा जायेगा, नारी को BOLD, Modern करने के नाम पर उसका दैहिक शोषण किया जायेगा । अवयस्क बच्चियां माँ बनेंगी और उनका role model कोई अमीर फिल्म स्टार होगी, जिनका जीवन चमक-दमक से भरा पर खोखला होता है। ग्रामीण अंचलों में प्रेम-अपनत्व नहीं शोषण और दिखावे का चलन बढ़ेगा और खेती की जगह जमीन बेच अमीर होने का रास्ता हर कोई अपनाएगा ।
 नैतिकता-प्रेम-सम्मान-अपनापन सब पुरानी बातें हो जाएँगी और मतलव से भरे रिश्तो का ही बोलबाला होगा।

           सिर्फ देशभक्त ही इन बातों की परवाह करते हैं, और बहादुरी से इनका सामना कर इन्हें परास्त करते है। पहले भी हमने किया था आजभी हमीं को करना है। सच्चे भारतीय होने का गौरवशाली जीवन जीना है। इस बार लड़ाई अपने आप से है, अपने आस-पास से है । मोर्चा संभाल समाज में कूद पड़ना हैं, किसी न किसी तरीके से समाज को सही दिशा में लाना है । सत्प्रव्र्ति संवर्धन और दुष्प्रवृत्ति उन्मूलन करना है । सिर्फ सेवा ही नहीं, संघर्ष भी करना है। और वो सबकुछ करना है जिससे हमारे राष्ट्र का मान बढे। आइयें अपना सामान्य जीवन जीते हुए एक असामान्य काम को अंजाम देते हैं, भारत का पुनर्निर्माण करते हैं ।